Report by- Sushil Dobhal
उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं अर्थशास्त्र विषय के प्रश्न पत्र ने परीक्षार्थियों को मायूस कर दिया। परीक्षा के बाद अधिकतर छात्र-छात्राएं खुश नजर नहीं आए। परीक्षार्थियों को उम्मीद थी कि अन्य विषयों की भांति ही अर्थशास्त्र का प्रश्न पत्र भी अच्छा आएगा किंतु प्रश्न पत्र में घुमा फिरा कर पूछे गए प्रश्नों ने परीक्षार्थियों को उलझा दिया। दूसरी और राज्य के विभिन्न इंटर कॉलेज प्रवक्ताओं ने भी अर्थशास्त्र प्रश्न पत्र को छात्रों की क्षमताओं की तुलना में जटिल बताया है।
सोमवार 10 मार्च को उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा परिषद रामनगर द्वारा संचालित कक्षा 12वीं के अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा संपन्न हुई। इस विषय में कठिन प्रश्न पत्र मिलने से छात्र मायूस नजर आए। अधिकतर परीक्षाकेदो पर परीक्षार्थी प्रश्नपत्र को लेकर संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना था कि जिस प्रकार उन्होंने परीक्षा की तैयारी की थी उसप्रकार के प्रश्न प्रश्नपत्र में थे ही नहीं। परीक्षार्थी नवनीत, आयुष, राधिका और अंजलि ने बताया कि उन्होंने विगत कुछ वर्षों के प्रश्न पत्रों और परिषद की वेबसाइट पर दिए गए आदर्श प्रश्न पत्र को ध्यान में रखकर तैयारी की थी लेकिन उनकी यह तैयारी परीक्षा में काम नहीं आई।
दूसरी ओर राज्य के विभिन्न इंटर कॉलेज प्रवक्ताओं ने अर्थशास्त्र के प्रश्न पत्र को लेकर हैरानी व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि उच्च बुद्धि लब्धि वाले परीक्षार्थियों को छोड़कर औसत दर्जे के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नपत्र जटिल था। साथ ही परीक्षा में दिया गया प्रश्न पत्र परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदर्श प्रश्नपत्रों से मेल नहीं खाता। जिस कारण अधिकतर परीक्षार्थी निराश नजर आए। जिस प्रकार के प्रश्न बोर्ड परीक्षा में पूछे जाते रहे हैं, इस बार वह नदारत रहे हैं। अर्थशास्त्र प्रवक्ता सुशील डोभाल, सुरेश उनियाल, राजेंद्र गिरी, कृतिका पांडे, गोविंद सिंह नेगी, बसंत बल्लभ पांडे, विनोद सिंह, युद्धवीर सिंह कुमाई, सुरेंद्र लाल शाह, राजेंद्र पासवान, मदन मोहन डिमरी, अर्चना पांडे और दिगपाल सिंह गड़िया आदि ने राज्य के अर्थशास्त्र प्रवक्ताओं के समूह में प्रश्नपत्र को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की हैं।
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